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Tuesday, 13 October 2020

स्वप्नों के परिंदे। ....

11:51 0 Comments

 स्वप्नों के परिंदे। ....चल रे। .... 



स्वप्नों के परिंदे। 
स्वप्नों के परिंदे। चल रे। .... 

मैं हु स्वप्न ,,, स्वप्न। ..स्वप्न 

तुम गहरी निंद सोते हो नं। ..बहोत गहरी। .. 

तब नं मैं हल्क़े से  तुम्हारी आँखों में। ... 

धी ---रे ---धी ---रे  आती हु। ... 

तुम्हे पता तक नहीं चलता ,

मै कैसेआता हु स्वप्न में। .. 

स्वप्न, तुम जो मन में संज्योते हो। .. 

वैसे ही मैं तुम्हें दिखती हु। ... 

तुम बिलकुल, जो सोचा है वो। .. 

कुछ अच्छा सोचते हो किसीके लिए 

मन में ,अंतःमन से ,सुखद। ... 

मैं सच्ची में वैसे ही पेश आती हु। .. 

तुम्हे दुःख हुआ ,बुरा देखा ,बुरा सुना ,.. 

मैं भी दुखी होती ,तुम्हे दुःख स्वप्न दिखता।।।।

मन जो बातें करते ,गुनगुनाते जो हो तुम। 

चलचित्र मैं वही , छुपा कर रखती। .. 

तुमने क्या क्या सोच रखा रखा है। .. 

उसे याद दिलाती हु मै सपने में । .. 

तुम कही भूल नं जाओ। ...

 मैं दोहराते रहती हु स्वप्न जो तुमने देखे।।।।

मई मन में तुम्हारे उड़ान भरती  हु। .. 

तुम्हे  सपनोंकी प्यारी दुनिया  अवगत कराती हु। .. 

मई क्या हु ,स्वप्न क्या है। ..https://kittydiaries.com/ 

बस ,मन की बोली है ,भाषा है 

मन धीरे धीरे संवाद करता अन्तःमन से,  

स्वप्न तो मन है। . सारे जहाँ में कितना  सुन्दर।।।

स्वप्न  हु मै , गगन,, धरा ओर संपुर्ण  ब्रम्हाण्ड।।।।

मई कही भी तुम्हे उड़ान भरा सकती हु.... 

आकाश तारे ,के समीप ले  जाऊ मई तुम्हें ?

या किसी सौरमंडल का चक्कर लगाऊं। ...

कहानियों में सुनी है। .. वह जाओगे, सप्तर्षि में 

बुढ़ीया  की खटिया पर  लेटेंगे ,तीन चोर भी देखोगे। ..

पंछिओंकि बोली बोलेंगे ,या जलचर पर हाथ फेरोगे। .

मै स्वप स्वप्न हु। ...तुम भी तो सोचैते मेरे मन से। .. 

 सपना देखु दिन में ,चारो प्रहरों मे..,रात में। . 

तुम सपना देखते हो तब तुम अचेतन होते। ..

तुम तो गहरी नींद सोए हो। ... 

तुम्हे क्या पता तुम कहाँ खोये हो।https://kittydiaries.com/  

मैं स्वप्न ,मै मन ,मैं  ह्रदय, तो जागृत रहता  ,तुम्हारे  लिए,... 

मै  निरंतर सचेत हु ,चेतना की जकड़न में ,प्यार में  ..

मै स्वप्न हु सो नहीं सकता ,मई कैसे सो सकता? .. 

स्वप्न दिखाना  ,उड़ान  भरान , मेरा कर्तव्य।

अपना कर्त्तव्य मैं कैसे भूलू ,कैसे मुकर जाऊ ?..

परिंदों को पंख लगाना,  ऊँचे खुल्ले आसमां को छुना।

.चलो उठो ,स्वप्न देखो ,उड़ान  भरो , 

स्वप्न  अपना, अपना लो ,पुरा  करो  

कोई परिंदा तुम भी बन जाओ...

स्वप्नों  की उड़ान लेकर। .. 

स्वप्न ,मै  स्वप्न ,मैं स्वप्न।  

रचना /लेखांकन ADV अर्चना गोन्नाड़े --ARCHANA GONNADE https://kittydiaries.com/





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Friday, 9 October 2020

प्रीत नादाँ , धरा आसमां। ..

10:05 0 Comments

प्रीत नादाँ , धरा आसमां। .....



प्रीत नादाँ , धरा आसमां। .. 

आज फिर बादल घिर आये। .... बारिश हुई..... 

ताप्ती धरा  महक रही। 

तृप्ति की सौंधी  सुगंध  .... 

आसमान भिनी भिनी खुशबु से भर आया। ..

माटी की सुगंध , खिलते पुष्पलताओंकी सुगंध।

महकती , छु गयी याद कोई  किसीकी। ... 

वही सुगंध धीरे धीरे सासोंमे, रुका सा....  

एक एक सांस ,गहरी सांस खिंच रही एकदुजे को। .  

ह्रदय हलके हलके जैसे प्राणायाम कर रहा। ... 

ह्रदय को ये कला अवगत है। .. सांस लेने की। ..

हलके से ,जोर जोरे से ,एक लय में।

 सासोंमे साँस मिलाती ,संथ गति चल रही होती। ..

 सासोंकी  की प्रक्रिया मालूम भी नं पड़ती। 

.बेमालुम चलती। .....निरंतरhttps://kittydiaries.com/  

बारिश की छोटी नाटी बुँद  बुन्दोंसे। . 

आसमान से जैसे इत्र बरस रहा हो.... 

इत्रदानी ईश्वर ने आज उंडेल  दी आसमान से। 

कुछ सजे  है लताओं वृक्ष ओर बिलगती बेलो पर ,

कुछ पर्ण ,पुष्पोपर,घर के दिवारोंपर,खिडकियोंपर।

दवबिंदु सजे है। .. एकसार मोती की माला। ..

आ गिरे आखिर सब बुँदे धरा की गोद पर। .. 

प्रित हुई ,धरा कितनी सम्मानित हुई। ..

सारे बिंदु दवबिंदु समाये गये धरा में। ..

फिर पुलकित हुई धरती ,अभिसारिणी ,

मनभाविनि ,मनमोहिनी। हरित धरा। .. 

धरा  अणुरेणु महकी , पोर पोर खिलखला 

आसमां की रूह ने धरा से गुजारिश की  

फिर महकती धरा ने भावभिना संदेश भेजा। 

आसमां  का आनंद मन  में समाये नं ।....https://kittydiaries.com/

रिमझिम रिमझिम सांसे चली। लय में ,ह्रदय में 

मन महकती रूह से आसमां। .. नादाँ 

प्रीत नादाँ , धरा आसमां। .. 

दुर क्षितिज पार  कुछ हलचल। ...

भोर का तारा --- हुआ नया जनम

 रचना /लेखांकन। ... adv अर्चना गोन्नाड़े ,,arcahan gonnade

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Thursday, 8 October 2020

फुलपाखरूं .....

00:59 3 Comments
    फुलपाखरूं .....फुलपाखरूं .....



 

 











फुलपाखरूं .....फुलपाखरुं                  
 फुलपाखरू कित्ती नाजुक नाजुक ... 
 बोट लावलं तरी पंख गळुन पडतील कि काय ... 
 अस्सं वाटायचं नेहमी ...खर्र सांगतेयं .. 
 लहानपणी फुलपाखरांमागे धावतांना खुपं मज्जा ... 
 ते हातातं कधी आलाचं नाही ... पकडता आला नाही ... 
 पण केवढा सोसं फुलपाखरुं हातांतं घेण्याचा ... 
 मग ताई दादाच्या मदतीनं ,फुलपाखरु पकडायचं ...
 हातातं , ओंजळीत क्षणभरं पकडायचं ..अगदी अलगद
 पंख तुटणार नाहीत याची काळजी घ्यायची ... 
 अस्सं हातावर ओंजळीत घेऊन झालं मनभरं निरखून झालं ,
 कि मग... मग ओंजळ उंचावुन, 
अल्लाद उघडुन अलगद सोडून द्यायचं , पुन्हा आकाशातं .... 
 फुलपाखरूं भुर्रकन निसटायचं अंजुलीतुनं ... 
 फुलपाखरूं पंखांचा ओंजळीला निसटता स्पर्श ... . 
 त्या सुखद स्पर्शाचा सुवास हातावर अजून रेंगाळतेय ..- - 
 फुलपाखरूं .... किती रंग उधळलेतं विधात्याने 
 इंद्रधनूच्या सप्तरंगांची सरमिसळ केली तरी ...
 त्यापेक्षा किती तरी अधिक रंगांची फुलपाखरे ...                                         
 पिवळ्या रंगावर काळे केशरी ठिपके ... 
 गर्द केशरी रंगांवर पिवळी चांदणी ... 
 काळ्या रंगावर लाल खडी खुल्ली 
 पांढरी शुभ्र फुलपाखरं त्यावर जांभळी केशरी किनार . 
 निळी जांभळी जणुं गोकर्णीची फ़ुले ... 
 मुलायम पंखांवर सुंदर सुंदर नक्षी ... 
 रंगीबिरंगी दुनिया फुलपाखरांची .... 
 कित्ती मनमोहक रंग फुलपाखरांचे ... 
 देवाने मुक्त हस्ते त्यांना वरदान दिलयं रंगांचं ... 
 चटक रंग लेऊन फुलपाखरूं छान मिरवतं ... 
 मस्त ह्या फुलांवरून त्या फुलांवर ... 
 गुलाबी गुलाब ,जाई जुई ,गवतफुलं, कोमलसं 
 क्षणभर इथे या फुलांवर परागकण वेचुन घेणारं .... 
 क्षणातं पलीकडे फुलांवर ... तिथेही मधुसेवन करणारं ...
 फुलपाखरूं फुलपाखरुच तें ..
पुन्हा धरावं का ? कुठे एका जागी विसावायला ... 
नक्को तें पडुन राहणं ... मी फुलपाखरूंचं बरं .. 
उडायचं ,फिरायचं ,मिरवायचं...https://kittydiaries.com/ 
 मी पाखरूं पाखरूं ... मन फुलपाखरूं ... 
 सुरवंटाचं फुलपाखरुं होतांना जरा विश्रांती ... 
 कुठे भिरभिणारं फुलपाखरूं नाही नजरेत ...
 पण एकदा का उडायला यायला लागलं ... 
 कुठलं घरं नि कुठे काय , मस्त स्वच्छंद .. 
 निळ्याशार आकाशातं वाऱ्यावर डुलायचं .. 
 पुन्हा फुलाफुलांवर मधुकण वेचीत जायचं .. 
 मस्त स्वच्छंदी ,मनमौजी ,लहरी ,फुलपाखरूं ...
 कुणी टोकावं त्यांना ,कुणी रोखावं त्यांना ... 
 स्वच्छंद जिवनाचे धनी फुलपाखरूं भिरभिरण्यातं
 आनंद असतो ... आनंद वाटतो ... 
 मन रंगले फुलापाशी ,... अंतरंग आकाशी .
पण जरा जपुन हो फुलपाखरांनो .. 
 फुलांपेक्षाही तुम्ही नाजुक आहात ,... 
 कोण घावं घालणारं नेम नाही .... 
 नाजुक नक्षीदार पाखरांनो, सोसवेल का हें ?
 पंख कुठे अडकणार नाहीत ,काळजी घ्या . 
 काटे टोचणरं नाहीत , जरा लक्ष द्या ... 
 पंखांना बळ द्या , स्वतःच स्वतःला .. 
 मस्त मस्त उडा ,पंख पसरून ... फुलाफुलांवर .. 
 मलाही पण फुलपाखरूं व्हायचयं ...
 तुम्हांला आवडेल का ?
 मनं फुलपाखरूं मनं ,पाखरूं ....पाखरूं ---
 लेखांकन / रचना ... adv. अर्चना सुधाकर गोन्नाडे .. .archana gonnade https://kittydiaries.com/


Tuesday, 6 October 2020

मेरी प्यारी माँ। ......

06:18 2 Comments

 

मेरी प्यारी माँ। ......





 















मेरी प्यारी माँ। ......https://kittydiaries.com/

माँ की गर्भ में मैंने नऊ मास सहवास पाया। .. 

माँ का एहसास था मुझे। . .. 

मैंने कहा,  माँ तुम सुनती हो नं.... 

मै तुम्हारे गर्भ से बात कर रही हु। .. 

मुझे तो लगता अभी मैं तुम्हारे गले मिलु। ..

और तुम्हारी खुप खुप  पप्पी लु  

माँ ,मैं तुम्हारी गर्भ में कितनी सुरक्षित हु। ..

 खुब आराम से हु यहाँ माँ मैं... 

तुम मत मेरी चिंता करना हाँ माँ। ..

कितना तुम मेरे लिए परेशां हो जाती हो माँ  

कितनी फ़िक्र  रहती तुम्हे। ...

मुझे कुछ नं हो गर्भ में। .. 

तुम अपनी साड़ी भी कितनी ढिलिसी बांधती हो।  

लेकिन माँ अभी तुम ढिलासा गाउन ही पहनो। ..

तुम्हे परेशानी न हो इसलिये। .. 

मैं  गर्भ में हिलु भी नहीं। ..देखो जरा  

कितने छोटे छोटे पैर डालते धीरे चलती हो माँ तुम। . 

तुम जब जाती हो डॉक्टर अंकल के पास। .. 

तुम भी तो स्थेटास्कोप  उठाती हो धीमे से। . 

अपनी कर्णों पर रख लेती और सुनती हो मेरे ह्रदय के स्पंदन। ... 

तुम्हे बहोत अच्छा लगता। ..https://kittydiaries.com/

तुम्हारी स्पंदन की  लय में    

मेरे भी ह्रदय स्पंदन चलते ..थोड़ा उपर ,निचे।  

 अंतर्मन मेरा अब तुम्हारे धड़कन जानता है माँ । .. 

तुम्हारा पेट से हाथ फेरना , थोड़ा थपथपाना।

मैं महसुस करती  हु। ..मुझे सहलाना  

वो स्वर्ग स्पर्श  कितना  रक्षित करता मुझे। .. 

और तो माँ मैं  खुप आराम से सो जाती हु। ... 

बिलकुल आँखे बंद करके , आँख मूँदके 

लाड़ प्यार ढ़ेर सारा करती  हो तुम मेरा। .. 

कितना स्वादिष्ट भोजन कराती मुझे। ...

कितने रंगोंसे सजाई अपनी थाली मेरे लिए 

दाल ,रेशमी चावल, नरम फुलके 

और उपरसे शुद्ध घी की धारा। . 

साथमे खट्टा अचार ,दही, मै  बड़े मजे से माँ....   

 कितना सुग्रास अन्न ग्रहण कराती तुम मेरे लिए 

 भरपुर पोषण हो इसलिए। .. कभी  चॉकलेट ,पानीपुरी।

मेरी दादी ,मेरी नानी क्या क्या खिलाते तुम्हे। .. 

कुजू किशमिश सूखा  मेवा

सतावे और नौवे महीने का पालना झुलाना। ... 

मै भी  झूल रही थी माँ ,तुम्हारे साथ  गर्भ मेँ। ...

माँ का ,भगवन का आशीर्वाद ,पुजा पाठ और न जानु क्या। .. 

देखो माँ जरा सुनो ,मै कितने दिन इस अंधःकार में रहु। .. 

डर सा  लगता है माँ मुझे कभी। .. 

मुझे  तुम्हे देखना है माँ अभी ..

लगता मै जल्दी तुम्हे  गले मिलु। 

तुम्हारे हाथ मेरे हातोंमे में लू। ..

गालोंकी पप्पी लु झपझप। ... 

माँ तुम्ही तो मेरे बल हो ,तुम्ही शक्ति हो 

तुम्हारे स्पर्श से में आश्वत हो जातीhttps://kittydiaries.com/ 

जैसे कोई अखंडित झरना है तुम्हारे पास। . 

ममता का ,वात्सल्य का ,प्रेम का। .. 

 तुम्हारे उबदार स्पर्श ,गोद से मिलेंगे न ये सब। .. 

मेरे  बहुत लाड प्यार तुम्ही करोगी नं  

और शाबासकी  भी तुम्ही दोगे  ना माँ  

शुभम भवतु आशीर्वाद भी तुम्ही करोगी। ..  

कुछ भूल चुक हो गयी तो मुझे  ही डाट देना माँ 

मैंने यदि न सुना तो मुझे कड़ी सजा  देना 

संस्करोंकी गठरी भी तुम मेरे लिए बांध राखी होंगी 

खुप पढ़ाई करना मुझे ,उसके लिए तुम्ही सहारा हो माँ 

मै अपने बल पर, खड़ी  हो जाऊ यही सपना  है माँ। .. 

बस तुम मेरा हाथ थामे रहना तुम ही तो मेरी शक्ति हो माँ

फिर मै  किसीसे न डरूंगी। न दुनिया से , कभी नहीं 

कोई संकट आये मै उसका सामना करुँगी ,मुकाबला करुँगी 

देखो माँ , मै  आउंगी तुम्हारे लिए , फुल लाऊंगी ,प्रकाश के   

घरभर मैं फुल सजा  दूँगी ,और तुमपर भी फूलोंकी बरसात करुँगी। .. 

तुम्हारा सुखदुख मै  बाटुंगी ,बहोत गप्पे लड़ाएंगे हम। .. 

अपने मन की बात तुम मुझे  बताना। .

कुछ मन में नं रखना ,सब सच्ची बात करना। ..  

देखो मै आ रही हु। देखो तो जरा चारो और 

कितनी सुंदर है दुनिया ,हसो लो माँ जरा ,मै आयी हु। . 

मुझे भी होना है तुम्हार जैसे। .बिलकुल तुम्हारे जैसे . 

मुझे तुमने आकार दिया न माँ, तुमने ही  मुझे घड़ा न माँ। . 

निर्मल प्रेम करना तुम्ही से  सीखा माँ  

तुम्हारी विरासत मै  आगे चलाऊँगी।।।।      

मैं  कैसे तुमसे अलग हो सकती हु। ..

गर्भ में ही इतने संस्कारों से झोली भर दी। .. . 

मैं  अनुसरण तुम्हारा ही करू  माँ...   .https://kittydiaries.com/ 

कितना अंधःकार क्यों न हो ।या फिर चकाचौंध रोशनी हो...

 तुम्हारी छत्र छाया में , सुरक्षा कवच में। ..

मैं शक्तिशाली बनुँगी माँ ,मैं  अकेली नहीं हु   

बस मैं तुम्हारे साथ चलुंगी ,तुम्हारी उंगली पकड़कर 

बस थामे रहना तुम मेरा  हाथ....पक्का। ..कसकर। .. 

आशीष सदा रखना तुम्हारा  हे माँ

आशीष रखना सदैव। .. 

यही प्यारी सी प्रार्थना  माँ। ...मेरी प्यारी माँ। ...  

लेखांकन ---- adv . अर्चना गोन्नाड़े archana gonnadehttps://kittydiaries.com/



  

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Sunday, 4 October 2020

चाँद आवारा हो गया

10:40 0 Comments

चाँद आवारा हो गया-------





चाँद आवारा हो गया-------https://kittydiaries.com/

निरभ्र अम्बर में देखो ,चाँद नज़र आ रहा 

राह अँधेरी चाँद की ,पर रोशनी दमक रहा ---१ 

चाँद की सवारी अभी तो निकली सैर पर 

आहिस्ता जरा चलने दो चाँद को रातभर ----२ 

चाँद के वास्ते बिखरी चमकती चाँदनिया 

चाँद का इश्कि किनाय, इश्क होवी चंदनिया---३

आबाद पूरा चाँद हैं ,महकती रोशनी पुर्णिमा 

चाँद समाये क्षीर में,चांदनी आरक्त झरना ----४ --

किर्दार चाँद निभाए ,ओर चाँद करे किरीश्मा

चाँद समीप चांदनी ,क्या कहकशाँ करे जमाना-- ५ 

इर्दगिर्द चांदनी झुले हैं ,चाँद आवारा हो गया

चाँद ही अब खुद गुनगुने,ये आवारगी मय  क्या----६ 

चाँद की राह तो नापी ,मौजी फिरे क़िस्त क़िस्त   

चौदवीं हो आफताब,अब्र ए  इश्क जस्त जस्त---७  

चाँद ने इश्क पी रक्खी वो चाँद आवारा हो गया 

इश्क ए फरियाद में,वो चाँद आवारा हो गया----८ 

रचना /ADV अर्चना गोन्नाड़े ARCHANA GONNADE

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Friday, 2 October 2020

कितनी सुन्दर हो तुम। ...... गुलाबो। ..

22:49 2 Comments

कितनी सुन्दर हो तुम। ...... गुलाबो। ..

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कितनी सुंदर  हो तुम। ...... गुलाबो। ..

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गुलाब की कलियों सी तुम। . 

सुन्दर  सुकुमार,अपने में सिमटी हुई। .. 

डालियों पर  तुम सजी हो ,

अभी तो कच्ची  कच्ची  धुप हो। .. 

कितनी सुंदर लगती  हो तुम। ..

कितनी प्यारी  हो लगती तुम  

लालिम रश्मि  ठहरें तुम पर।https://kittydiaries.com/ .. 

तुम  हो नूरी सी  भाती  हो। 

मन कैसे लुभाती हो तुम। ..

भोली भाली सी  तुम हो.

कोई भी मोहित तो तुमपर  

परिवर्तन तो प्रकृति का नियम  है। .. 

तुम भी तो प्रकृति हो, परिवर्तन सहज भाव। .. 

गुलाब हो  तुम अब , गुलाबी धडकन। .. 

पुर्णरूपेण तुम खिली हो।  कितनी सुंदर हो तुम.

पेड़ों भी खिल उठे है ,डलिया भी चहक रही। .. 

तुम सा गुलाब पाकर देखो क्यों अचंभित सी रह गयी।

मुलायम नाजुक पंखुडिया गुलाबी ।

 कणकण बांध रखा है। ... 

मुलायम  स्पर्श तुम्हारा मलमल सा  .

अमृतसिंचन से है भीग रहा।  ...  

सुकोमल स्पर्श गुलाबो , स्वप्नपरी 

कली कोमल कच्ची , मृदुल पाती झिलझिलाती 

चुभती काटो की महफ़िल मेँ गुलाबो 

गुलाबो ,रहो न  ऐसे  सजीधजी।

गुल गुलाबो शर्माओ नं , है लालिम लज्जा  

डालियाँ पर लहराती तुम ,मन मोह लेती तुम 

पवन गुदगुदाये गुलाबो ,खुलकर तो जिओ तुम.... 

अस्पर्श रूप गुलाबो ,कितनी सुंदर हो तुम

गुल गुलाबो और गुलशन 

प्रतिबिंब तुम हो प्रकृति का।

चित्र हो तुम सादगी का https://kittydiaries.com/

व्यक्त अव्यक्त सपनोंका 

कितनी सुन्दर हो तुम। ...... गुलाबो। .. 

रचना --adv .अर्चना गोन्नाडे archana 


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Thursday, 1 October 2020

सुंदरम मेरा देश भारत, दि इंडिया।।।।

22:28 0 Comments

सुंदरम मेरा देश  भारत, दि इंडिया।।।।



सुंदरम मेरा देश  भारत, दि इंडिया।।।।

मैं एक भारतवासी हु। .. इंडिया वासी हु।  

यह मेरा सौभाग्य है मैंने स्वतंत्र भारत में जनम पाया। .. 

जंजीरोंमें जकड़ी हुई भारत माँ को मैंने नही देखा। .. 

चिखते चिल्लाते मैंने नहीं देखा माँ भारती को।

 रक्तपात होते हुए वो स्वातन्त्र संग्राम। .. 

तोपो बन्दुकोंकी आवाज़ , खुप अत्याचार 

मैं साक्षी नहीं हु इन  घटनाओंकी। ... 

हाथोंमें अंगारे लिए देश के लिए मर मिटना ,

वो शहीदोंका फांसी पर चढ़ना, हॅसते हॅसते ।।

एक बिलखती माँ को भारती माँ अपने  गले लगाना ।

ऐसा किसीका जुदा हो जाना ,रोना बिलखना,गले लगाना    .. 

मैंने कभी अनुभव नहीं किया। मैं  स्वतंत्र भारत की नागरिक हु...

स्वतत्रंता के वो गीत, झेंडा हाथ में  लिए फहराना।

प्रभात फेरिया ,रग रग में स्वतंत्रता के बीज़ बोना। .. 

कैसी लोग होंगे वो जिन्हीने अपने प्राण न्यौछावर कर दिए..

किस शक्ति का संचार होगा उनमें ,कैसा आवेश होंगे उनका 

किस चीज से वो भारित होंगे ,किस से प्रेरित होंगे। ... 

मैं  कैसे इन बिते हुए कल को सच मानु। ..

क्या प्रमाण है बीती हुए क्षण का,सच्च का  

कहानिया गढ़ती है ,इतिहास रचता है।

गवाह तो निकल जाते है यु ही।,अपनी निशानी बनाकर  

क्या  मैं एक इतिहास बना सकती हु। .

आनेवाले कल का ,पल का,क्या मैं इतिहास बन सकती ?

क्या .बिते हुए कल के  इतिहास की  रचित नींवपर। ..  

 क्या मै रच पाऊँगी आनेवाले कल का मेरे देश का इतिहास ? 

गौर किजिये ,आज भी माँ भारती ,चंगुलों में फसीं  है। 

.मेरे ही लोगोंने बंधक बना रक्खा  है ,माँ भारती को ...

रोज लुटपाट होती है ,रोज दंगे फ़साद होते है। .. 

माँ बहनो की  इज्जत चौराहो पर आ खड़ी  है... 

अत्याचार तो हर दिन क तमाशा है। .... 

खबर अब खबर नहीं। सनसनाटी।।।  , . 

कोई खबर अब नयी ही  नहीं रही। .आदत सी हो गयी। .

देश की सीमारेखाओंमें इंसान बट चुका।

खरे का मुलामा चढ़ाकर खोटा बिक रहा। .. 

देशवासियों ये क्या हो रहा है ? 

मैंने स्वतंत्र भारत में जनम लिया।।। 

कुछ कर्तव्य है क्या मेरा माँ भारती के प्रति? .. 

मैं साक्षी हु इन  घृणित  घटनाओंकी। 

लाचार माँ बहनें तडप रही ,घुट रही 

लोग ,भूखे नंगे  लाचार है ,हाथोंको काम नहीं 

कुछ कर्तव्य तो मेरे  है ,स्वतंत्र भारत की जो नागरिक हु। . 

माँ भारती को स्वतंत्र करू इन दरिंदोंसे 

चोर लुटेरोंसे ,डाकुओंसे ,,, बदमाशोंसे। ..

वो बलात्कारी पशुओंसे ,मुक्त कर दु।

घिन आती नजरोंसे, बेपर्वाह स्पर्शोंसे मुक्त करू  ..  

फिर से सहलाऊ प्यार से माँ भारती को ..मेरे हिस्से का  

समाज में  माथा ऊँचा लेकर घुमनोवालो। ..

चेहरों  पर मुखौटा ओढ़ने वालों। ..  

तुम्हें  भी नरक का रास्ता दिखा दु। ..

रहो सावधान मेरे देशवासियों ,मेरे भाईयों ,मेरे बहनो

थोड़ा अपना अपना कर्तव्य निभाओं,प्यार से   

थोड़ा अपना भार उठाओ। संभल जाओ ....

माँ भारती मेरी है  , भारत मेरा है ,इंडिया मेरा है . 

मुक्त करो फिर एकबार हमारी माँ भारती को। .. ें

इन  बेरहम लोगोंसे ,संकटोंसे ,सलखोसे ओर जंजीरों से । ..

तोड़ दो एक एक कड़ी वो जंजीरोंकी।।। जकड़न की 

 भारत मेरा होंगा महान ,सुजलाम,सुफलाम

 स्वतंत्र ,मुक्त , आज़ाद , बंधन  से मुक्त। ..  

स्वस्थ भारत ,सुंदर भारत। .. 

सुंदरम मेरा  देश भारत , दी इंडिया। ... 

जय भारत की ,जय भारती माँ की...  

जयहिंद  जयहिंद  जयहिंद। 

लेखांकन /रचना। adv अर्चना गोन्नाड़े archana gonnade

nagpur,Maharashtra,India M--9860499417 

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